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ओछी राजनीती

राजनीती अपने चरम पे,
सब टिके हैं झूठे धर्म पे।

कहीं किसी के घर,
ना अनाज है ना रोटी है,
जिन्दा रह कर भी जिंदगी,
आज हर पल बस रोती है,
राजनीती बड़ी ही ओछी है ,Indian Politics

धर्मों के बटवारे में,
प्यार के निपटारे में ,
हर गली हर चौराहे पे,
सब इसके ही गोटी है,
राजनीती बड़ी ही ओछी है ,

कहीं आवरू भी अपनी शर्मिंदगी पे हर पल रोती है,
क्या आसमां क्या जमीं, अब तो फसल भी इन्हीं की होती है,

इन सब को तो छोड़ भी दें,
अब तो ज़िन्दगी भी,
राजनीती से छोटी है,
सच में ,
राजनीती बड़ी ही ओछी है||

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Author:

Frolicky, Blogger, Public Relations, Career & Education Consultant

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