Posted in Hindi, Life, Love, Poem, Poetry, Real life, Smile

ख़्वाब

कल मिला था “ख़्वाबों’ से,
सवालों से भरी
उलझनों से दबी,2016-12-16-18-53-51
थोड़ी बेदर्द
बड़ी बेरहम..
ज़िन्दगी से सवाल पूछती,
हर तरफ जवाब ढूंढती,
थोड़ी जिद्दी सी
थोड़ी बेशर्म..
ज़िन्दगी के रस्ते पे,
सपनों के बस्ते पे,
सवालों से भरी
उलझनों से दबी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से !!
देखा उसे जद्दोजहद करते,
सिहरते,
बिखरते,
रेत की तरह बंद मुट्ठी से फिसलते,
बचती रही वो,
फिर भी बढ़ती रही,
थोड़ी अतरंगी सी
बड़ी सतरंगी सी
धुंध में भी देख लेती थी वो,
सपनों का रास्ता पूछती हुयी,
कुछ रिश्तों से
तो फिर कहीं,
अजनबियों से
अपनों का वास्ता पूछती हुयी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से..
देखा उसे
वज़ह बनती हुयी,
किसी के मुस्कुराने का,
किसी के नए किस्से बनाने का,
सवालों से भरी
उलझनों से दबी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से !!
अपनों का वास्ता पूछती हुयी,
सपनों का रास्ता पूछती हुयी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से !!

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Author:

Frolicky, Blogger, Public Relations, Career & Education Consultant

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