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रामनवमी के शुभावसर पर भव्य हिन्दू अखाड़ों का अद्भुत जनसैलाब, एक विहंगम दृश्य का अनुभव

 

WhatsApp Image 2018-03-25 at 20.54.25जन सैलाब या भक्ति का जूनून या फिर रामलला से प्यार, रामनवमी के शुभावसर पर भव्य हिन्दू अखाड़ों का अद्भुत जनसैलाब, एक विहंगम दृश्य |
और यहाँ बात हो रही है अयोध्या या काशी की नहीं जबकि झारखंड की राजधानी रांची की।
भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर रांची में श्रद्धा, उल्लास और भक्ति का ऐसा जनसैलाब दिखा जैसा की शायद और किसी बड़े धार्मिक स्थल पे बहुत बड़े त्यौहार में होता है |WhatsApp Image 2018-03-26 at 08.54.47
संयोग से मुझे अलग अलग सालों में रामनवमी के दिन ही अयोध्या, काशी और रांची में अखाड़ों में शामिल होने का मौका मिला लेकिन भव्यता के मामले में जो जनसैलाब और जो बंदोबस्त रांची में देखने को मिला वो कहीं नहीं | ये शहर सही मामले में रामनवमी को एक त्यौहार जैसा महसूस करवाता है आपको , कोई बहुत बड़ा धार्मिक इतिहास नहीं है रांची का रामलला के साथ लेकिन रामनवमी की भव्यता आपको ये सोचने को मजबूर जरूर कर देगी की रांची का कुछ न कुछ धार्मिक इतिहास जरूर है श्री राम के साथ |
शहर पूरा केशरीमय हो जाता है और साथ ही सबकुछ थम जाता है सिवाय अखाड़ों और झांकियों के, तो अगर आप कभी प्लान करें तो ये जरूर समझ

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लें की कार या गाडी से घूमना तो संभव नहीं है और न ही कोई किराये की गाडी आपको मिलने वाली है इस दिन|
कार्यक्रम की शुरुआत होती है छोटी सी पूजा से जो रांची क साथ साथ आसपास ही नहीं उत्तर प्रदेश , महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों से भी आते हैं , हर एक टोली को अखाड़ा नाम दिया जाता है तक़रीबन 100 छोटे- बड़े अखाड़े अपने अपने इलाके से झांकी लेकर निकलते हैं जिसमें एक सबसे बड़ा ध्वज होता है जो अखाड़े की पहचान होती है | ध्वज लेकर कुछ भक्तगण सबसे आगे चलते हैं और पीछे पीछे रामलला की भक्त सेना भजन भक्ति में मदमस्त हो कर बैण्ड – बाजे के साथ उदघोष करती हुयी चलती है बिच बिच में थोड़ी थोड़ी दुरी पर ही कई मण्डली वालों ने या कुछ समाज सेवी संस्थान वालों ने चने गुड़, कुछ फल और रस की व्यवस्था कर रखी होती है।


चारों ओर से निकलने वाले ये अखाड़े जैसे ही एक दूसरे के इलाके से गुजरते हैं वो आपस में गले मिलकर फूल माला से एक दूसरे का जय श्री राम के उदघोष के साथ स्वागत करते हैं और इस मिलन के साथ ही एक अखाड़ा दूसरे अखाड़े क साथ पंक्ति बद्ध हो कर जुटता चला जाता है और फिर क्रमशः यही सिलसिला चलते रहता है | हालाँकि हर अखाड़ा अंत में अपने इलाके में लौट कर आता है लेकिन गंतव्य स्थल के रूप में फिरायालाल चौक माना जाता है वहां पहुँच कर सारे रामलला के ध्वज लहराए जाते हैं और ये सब भव्य नजारों को देखने के लिये करीब 4 लाख से ऊपर भीड़ एकत्रित होती है जो की दोपहर में करीब 3 बजे से शुरू हो 10 बजे तक चलता है |
हनुमान जी के प्रतीक से सुसज्जित ध्वजों की ऊंचाई ५० फ़ीट से लेकर २५१ फ़ीट तक होती है और मजे की बात ये है की हे सारे ध्वज हर अखाड़े क साथ आते हैं और चंद सेकंड में ही बांस और रस्सियों के सहारे खड़े कर दिए जाते हैं बड़े से बड़ा ध्वज भी खड़ा हुए बिना नहीं रहता आप निचे के वीडियो में अखाड़ा भक्तों का प्रयास देख सकते हैं

इन सब के साथ झारखण्ड सरकार भी बधाई के पात्र हैं पुलिस के साथ साथ मेडिकल , ड्रोन और हेलीकाप्टर से निगरानी और पुष्पवर्षा इस आयोजन में चार चाँद लगा देता है|
इतने बड़े आयोजन में सभी धर्मों के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जो एक बहुत ही बढ़िया नमूना पेश किया गया है सच्चे भारत का |
केंद्रीय महिला महावीर मंडल के अखाड़े में करीब 300 महिलाएं शामिल हुईं। उधर बच्चे श्रीराम और हनुमान की वेशभूषा में शामिल होकर माहौल को राममय बना रहे थे तो ढोल-नगाड़े और ताशे की धुन पर अखाड़ा के साथ शामिल खिलाड़ियों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए।


मुझसे अगर पूछिए तो सबसे बेहतरीन श्री महावीर मंडल रांची महानगर की शोभायात्रा में महाराष्ट्र की शिव प्रताप ताशा पार्टी का बैण्ड था । संकट मोचन मंदिर के पास से निकली शोभायात्रा में शामिल ताशा पार्टी के 65 कलाकारों ने हनुमान चालीसा, भीम रूपी मंत्र शिवाजी का घोष, गणेश मंत्र, गरबा एवं करुणामयी धुन बजाकर राम भक्तों से वाहवाही लूटी।


पुलिस प्रशासन की नजर में रांची भले अति संवेदनशील क्षेत्र में शामिल हो लेकिन पर्व त्योहारों में यहां का माहौल एक अलग ही कहानी बयां करता है। दो समुदायों के बीच आपसी लगाव और जुड़ाव का अदभुत नजारा रामनवमी की शोभायात्रा में भी दिखायी पड़ा। रामभक्तों की ओर से रविवार को रामनवमी की शोभायात्रा में शामिल रामभक्तों का स्वागत मुस्लिम समुदाय ने जोशो-खरोश से किया।
लगभग दो दर्जन मुसलिम संगठन की ओर से कई जगहों पर स्वागत शिविर लगाया गया। कहीं शोभायात्रा में शामिल रामभक्तों का पगड़ी बांधकर स्वागत किया गया, तो कहीं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
आजकल की गन्दी राजनीती से अलग अगर आपको असली भारत देखना हो जहाँ किसी भी राजनितिक पार्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं हो और आप वाकई में सौहाद्र और उल्लास भरा त्यौहार देखना चाहते हैं तो एक बार रामनवमी देखने रांची जरुर आइयेगा | मैं दंग तो इस बात से हूँ की आजतक इस पर कोई डॉक्यूमेंट्री कैसे नहीं बनी है|
हालाँकि लिखना और भी चाहता था लेकिन फिर कभी, फिलहाल जय श्री राम के साथ समाप्ति करूँगा | एक छोटा सा प्रयास था कुछ बताने का, तकनीक की सहायता से लिखे शब्दों में कुछ त्रुटि हो सकती है, खेद है उसके लिए |

Photos and Video are Copyright, click by Self.

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ख़्वाब

कल मिला था “ख़्वाबों’ से,
सवालों से भरी
उलझनों से दबी,2016-12-16-18-53-51
थोड़ी बेदर्द
बड़ी बेरहम..
ज़िन्दगी से सवाल पूछती,
हर तरफ जवाब ढूंढती,
थोड़ी जिद्दी सी
थोड़ी बेशर्म..
ज़िन्दगी के रस्ते पे,
सपनों के बस्ते पे,
सवालों से भरी
उलझनों से दबी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से !!
देखा उसे जद्दोजहद करते,
सिहरते,
बिखरते,
रेत की तरह बंद मुट्ठी से फिसलते,
बचती रही वो,
फिर भी बढ़ती रही,
थोड़ी अतरंगी सी
बड़ी सतरंगी सी
धुंध में भी देख लेती थी वो,
सपनों का रास्ता पूछती हुयी,
कुछ रिश्तों से
तो फिर कहीं,
अजनबियों से
अपनों का वास्ता पूछती हुयी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से..
देखा उसे
वज़ह बनती हुयी,
किसी के मुस्कुराने का,
किसी के नए किस्से बनाने का,
सवालों से भरी
उलझनों से दबी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से !!
अपनों का वास्ता पूछती हुयी,
सपनों का रास्ता पूछती हुयी,
कल फिर मिला था ख़्वाबों से !!

भूल

purple-and-blue-abstract-wallpaper2.jpgख़्वाबों के पीछे,
जिंदिगी यूँ उलझी..
हकीकत में रहने का,
सलीका ही हम भूल गए..
जात धरम की बन्दिशें,
और ये फ़िजूल की दर्रे दिवार ऐसी,
रिश्ते निभाने तो दूर,
अपना बताने तक का तरीका भी हम भूल गए..
फ़िज़ाओं में ज़हर कुछ यूँ घुला है ग़ालिब,
इशारे और इज़हारे इश्क़ तो दूर,
इंसान आज बात करने का सलीका भी भूल गए..

© #FrolickySays

 

डॉ. कलाम के लिए

ऐ कलम तू उठ न कलाम लिखना है..kalam
हिन्द के लिए नया विज्ञान लिखना है..
लिखना है सम्मान बहुत,
अनगिनत अरमान लिखना है..

ऐ कलम उठ न कलाम लिखना है..
हिन्द के सपूत का,
सुनहरे अक्षरों में नाम लिखना है..
बच्चों के प्रिये एक इंसान लिखना है..

ऐ कलम तू उठ न कलाम लिखना है..
अंतरिक्ष से परे पहचान लिखना है..
कलम और शिक्षा का पैगाम लिखना है..
ऐ कलम तू उठ न कलाम लिखना है..||

भारत रत्न कलाम सर को सादर श्रृद्धासुमन ‪#‎TributeToDrKalam‬

ओछी राजनीती

राजनीती अपने चरम पे,
सब टिके हैं झूठे धर्म पे।

कहीं किसी के घर,
ना अनाज है ना रोटी है,
जिन्दा रह कर भी जिंदगी,
आज हर पल बस रोती है,
राजनीती बड़ी ही ओछी है ,Indian Politics

धर्मों के बटवारे में,
प्यार के निपटारे में ,
हर गली हर चौराहे पे,
सब इसके ही गोटी है,
राजनीती बड़ी ही ओछी है ,

कहीं आवरू भी अपनी शर्मिंदगी पे हर पल रोती है,
क्या आसमां क्या जमीं, अब तो फसल भी इन्हीं की होती है,

इन सब को तो छोड़ भी दें,
अब तो ज़िन्दगी भी,
राजनीती से छोटी है,
सच में ,
राजनीती बड़ी ही ओछी है||