Tag Archives: Life

भूल

purple-and-blue-abstract-wallpaper2.jpgख़्वाबों के पीछे,
जिंदिगी यूँ उलझी..
हकीकत में रहने का,
सलीका ही हम भूल गए..
जात धरम की बन्दिशें,
और ये फ़िजूल की दर्रे दिवार ऐसी,
रिश्ते निभाने तो दूर,
अपना बताने तक का तरीका भी हम भूल गए..
फ़िज़ाओं में ज़हर कुछ यूँ घुला है ग़ालिब,
इशारे और इज़हारे इश्क़ तो दूर,
इंसान आज बात करने का सलीका भी भूल गए..

© #FrolickySays

 

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तरसे है दिल

ओ पिया सुन तो ले.. तड़पे ये दिल,
ओ सनम प्यार तू देख,
मेरा ऐतबार तू देख..
ओ पिया सुन तो ले.. तड़पे ये दिल,
है मेरे दिल ने कहा,
हर कहीं इतना ढूंढा,
जाने क्या हुयी है खता,
तरसे है दिल।
ओ पिया सुन तो ले.. तड़पे ये दिल।।
क्यों नहीं मुझपे यक़ीन,
तुझको ऐतबार सनम
कैसे बतलाऊं तुझे,
है कितना तुझसे प्यार सनम,
ओ पिया सुन तो ले.. तड़पे ये दिल।
ओ पिया सुन तो ले.. तरसे ये दिल।।

पिया आने को है

ओ रैना संग चल, ओ रैना मंद चल…
पिया मोरा…
पिया मोरा आने को है…
हर एक पल, ओ रैना संग चल,
मोरी बात सुन, जज्बात सुन,
हर पल के तू  हालात सुन,
रैना सुन तो ले….
ओ रैना संग चल, ओ रैना मंद चल…
पिया मोरा..
पिया मोरा आने को है..
कैसे उन्हें धरुं कैसे बाहों में भरूं..
तड़पे ये मन, दिल की छुवन,
नैना नीर भरूँ, मैं तोसे का कहूँ,
रैना संग चल, ओ रैना मंद चल…
पिया मोरा…
पिया मोरा आने को है…
वो अजीब लोग वो सजीव लोग…
कहीं से कहीं,
कही अनकही,
पिया मोरा…
पिया मोरा आने को है…
बौराई सी उनकी याद में,
तड़पूँ अब दिन रात मैं,
रैना दूर जा, तू रैना अब ना आ,
ओ रैना सुन तो ले, ओ रैना थम तो ले…
पिया मोरा…
पिया मोरा आने को है…
© ☼ अपने जन्मदिवस ३ दिसंबर पर

Jajba

सवेरा होने से पहले ही उठ जाना, स्कूल जाने के लिए तैयार होना और फिर उसकेपिताजी उसे स्कूल तक छोड़ने जाते थे हर रोज .. केवल इस लिए नहीं की वो अपने माँबाप की एकलौती बेटी है बल्कि इस लिए क्यूंकि वो नहीं चाहते की उनकी बेटी कोकिसी तरह की दिक्कत हो स्कूल जाने में , पहली से दसवी और फिर बारहवी सेकॉलेज तक भी ये सिलसिला चलता रहा , बाकी लोगों की तरह वो भी अपनी बेटी कोस्कूल छोड़ने जाया करते थे स्कूल से जब कॉलेज गयी तब थोड़ी दुरी कम हो गयी , घरसे बस मेन रोड तक ही छोड़ने जाते हैं, मिरांडा हाउस में चुनी गयी है आज वो,गाडी की औकात तो नहीं थी, अपनी गरीबी छुपाने के लिए जब स्कूल छोड़ने जाते थेतब भी बस स्कूल से पहले वाले मोड़ तक ही छोड़ने जाते थे, लेकिन जितनी थी उतनेमें ही सब खुश थे बाप बेटी सब खुश ….एक चीज जो आज तक नहीं थी वो ये की वो कल भी अपनी बेटी को साइकिल पे बिठा करले जाते थे और आज भी साइकिल से ही ले जाया करते …
बेटी भी ऐसी की कभी अपनेपिता से कोई भी शिकायत नहीं की …. और जिस दिन पिता की तबियत ख़राब हो उस दिनदोनों की अपनी अपनी जिद .. पिता चाहता की मैं पहुंचाने जाऊं, और बेटी चाहतीकी पिता जी आराम करें , पिता ने तो बस इतनी सी कोशिश की थी की अपनी बेटी कोएक कामयाब इंसान बना सके , आज के समय में दिल्ली जैसे शहर में आपकी बेटी जवानहोकर सुरक्षित रहे तो ये भी खुद अपने आप में उपलब्धि है।
आज उस पिता की ख़ुशीकी सीमा नहीं रही जब उन्हें पता चला की उनकी लाडली 26 साल के उम्र में IPSमें चुनी गयी है दिल्ली जल बोर्ड में चपरासी की नौकरी करने वाले इस इंसान नेसाइकिल से ही अपनी बिटिया की जिंदगी बनायी।
ऐसे जज्बे को सलाम ….

Game of Life / ज़िन्दगी के खेल

lifeजिन्दगी,
जिन्दगी खेलती रहती है अठखेलीयाँ एक जुअे की तरह,
हम से,
तुम से,
हम सब से एक धुऐँ की तरह !!
कभी गीत गाती है,
कभी गुनगुनाती है,
एक लौ की तरह कभी डगमगाती है,
हम चलते रहते हैं, कभी खुद के लिए तो कभी दूसरों के लिए जलते रहते हैं,
ज़िन्दगी के सफर में,
दिन पर दिन पिघलते रहते हैं, मोमबत्ती की तरह।
ज़िन्दगी,
जिन्दगी खेलती रहती है अठखेलीयाँ एक जुअे की तरह ,
हम से,
तुम से,
हम सब से एक धुऐँ की तरह !!
कुछ जीते हैं किसी अनजान के लिए तो कुछ जीते हैं अपने माँ बाप के शान के लिए,
साल दर साल मिलते रहते हैं अजनबी, पर क्या बन पते हैं अपने सभी?
कभी सपने सजाती है,
कभी खुशियाँ दिलाती है,
फिर कभी रुलाती है,
कभी कभी तो किसी अनजान से एक पतले डोर जैसा रिश्ता भी बांध जाती है,
डोर पतली सी और रिश्ता ज़िन्दगी भर के लिए…
ज़िन्दगी,
सपने संजोये एक मलमल के गलीचे की तरह,
बिना हरियाली के एक बड़े बगीचे की तरह,
ज़िन्दगी,
जिन्दगी खेलती रहती है अठखेलीयाँ एक जुअे की तरह ,
हम से,
तुम से,
हम सब से एक धुऐँ की तरह !!
– अपने जन्मदिवस 3 Dec पर खास …

– सूर्य कान्त शर्मा